टोक्यो ओलंपिक (tokyo2020) : भारत का टोक्यो ओलंपिक का पूरा सफ़र

सिल्वर से शुरू होकर गोल्ड पर ख़त्म हुआ

indian olympic medal winners

नई दिल्ली। टोक्यों ओलंपिक में भारत का शानदार सफ़र रहा। भारतीय खिलाड़ियों ने 7 मेडल जीत कर पूरे देश का नाम रोशन किया है. भारतीय खिलाड़ियों नें जिस ज़ज्बे के साथ प्रदर्शन किया वह क़ाबिले तारीफ़ है. टोक्यो ओलंपिक 2020 का आयोजन वैश्विक कोरोना महामारी के कारण 2020 में नहीं हो पाया था.

इस बार का ओलंपिक कई मायनों मे भारत के लिए उम्मीद लेकर आया था. इस बार भारत की बेटियों ने जिस तरह से प्रदर्शन किया है उसको शब्दों मे उल्लेखित नहीं किया जा सकता.

चलिए जानते है भारत ने 7 मेडल किस खेल मे जीते और वह कौनसा खिलाड़ी है जिसनें यह उपलब्धि हासिल की.

1 साइखोम मीराबाई चानू (Saikhom Mirabai Chanu)

भारत के उत्तर पूर्वी राज्य मणिपुर की रहने वाली मीराबाई चानू ने टोक्यो ओलंपिक 2020 में 49 किलोग्राम भारोत्तोलन में भारत के लिए पहला रजत पद (Silver Medal) जीता. इससे पहले भारत की कर्णम मल्लेश्वरी नें सिडनी ओलंपिक 2000 में कांस्य पदक (Bronze Medal) जीता था.

 मीराबाई चानू को खेल के क्षेत्र में योगदान के लिये भारत सरकार से पद्म श्री एवं राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार मिल चुका है.

2 लवलीन बोरगोहेन (Lovlina Borgohain)

असम के गोलाघाट जिले की रहने वाली लवलीन बोरगोहेन मुक्केबाज़ है. टोक्यो ओलंपिक 2020 में लवलीन बोरगोहेन नें 69 किलोग्राम श्रेणी में भारत के लिए कांस्य पदक (Bronze Medal) जीता है. इससे पहले भारत नें ओलंपिक बाक्सिंग मे दो मेडल जीते है. 2008 में विजेन्द्र कुमार और 2012 में मैरिकॉम नें भारत को पदक दिलाए थे. लवलीन बोरगोहेन को 2020 में अर्जुन अवार्ड से सम्मानित किया गया था.

3 पुसर्ला वेंकट सिंधु (PV Sindhu)

पी.वी. सिधुं विश्व वरीयता प्राप्त भारतीय महिला बैडमिंटन खिलाड़ी हैं . पी.वी. सिधुं भारत की एकमात्र खिलाड़ी है जिसने ओलंपिक में महिला एकल बैडमिंटन में रजत पदक (Silver Medal)  और कांस्य पदक (Bronze Medal) जीता है. 2016 के रियो ओलंपिक में पी.वी. सिधुं ने रजत पद जीता था और टोक्यो ओलंपिक मे कांस्य पदक जीता है. भारत के आंध्र प्रदेश राज्य की रहने वाली पी.वी. सिधुं (BWF) वर्ल्ड बैडमिंटन चैंपियनशिप जीतने वाली पहली भारतीय शटलर हैं।

पी.वी. सिधुं को भारत सरकार के कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है.

4 रवि कुमार दहिया (Ravi Kumar Dahiya)

रवि कुमार दहिया 57 किलोग्राम फ़्री स्टाइल कुश्ती में भारतीय पहलवान है. टोक्यो ओलंपिक में रवि कुमार दहिया फ़ाइनल मुकाबले में रुसी ओलंपिक समिति के पहलवान ज़ोर उगुएव से 7-4 से हार गए थे पर देश के लिए रजत पदक (Silver Medal) लाकर नाम रोशन किया.

हरियाणा के सोनीपत ज़िले के नाहरी गांव में जन्मे रवि दहिया ने 10 साल की उम्र से दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में सतपाल पहलवान के मार्गदर्शन में कुश्ती के गुर सीखना शुरू कर किया था. रवि दहिया ने 2015 में जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल, 2018 में अंडर 23 वर्ल्ड चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल, 2020 की एशियाई कुश्ती चैंपियशिप में गोल्ड मेडल, 2021 में एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीत चुके है

5 पुरूष हॉकी टीम (Indian hockey team)

आखिरकार भारत की हॉकी टीम ने 41 साल के मेडल के इंतजार को ख़त्म कर दिया. भारत ने 1928 से लेकर 1956 तक लगातार 6 गोल्ड मेडल जीते थे. टोक्यो ओलंपिक में 41 साल के इंतज़ार के बाद भारत ने फिर ऐतिहासिक जीत हासिल की और कांस्य पदक (Bronze Medal) जीता है जो एक बहुत बड़ी उपलब्धि है.

भारतीय हॉकी टीम को ओडिशा सरकार स्पॉनसर कर रही है. हॉकी टीम की इस जीत से, आने वाला समय देश मे हॉकी के लिए अच्छा साबित होने वाला है. वही दूसरी तरफ महिला हॉकी टीम चाहे टोक्यों ओलंपिक मे कोई पदक नहीं जीत पाई पर टीम का प्रदर्शन दमदार रहा. महिला हॉकी टीम का चौथे पायदान पर पहुंचना कोई साधारण उपलब्धि नहीं है.

6 बजंरग पूनिया (Bajrang Punia)

बजंरग पूनिया 65 किलोवर्ग फ़्री स्टाइल कुश्ती पहलवान है. टोक्यों ओलंपिक में बजंरग ने कज़ाख़स्तान के दौलेत नियाज़बेकोव को एकतरफा 8-0 से हराकर कांस्य पदक (Bronze Medal) जीता.

बजंरग पूनिया ने अपनी कुश्ती की शुरूआत हरियाणा के झज्जर ज़िले के कुडन गांव से की और 12 साल की उम्र में वे पहलवान सतपाल से कुश्ती के गुर सीखने दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम आ गये थे. बजरंग पहलवानी में योगेश्वर दत्त को अपना मॉडल, गाइड और दोस्त मानते है.  

2018 साल के राजीव गांधी खेल रत्न के बजरंग भी दावेदार थे पर उन्हे यह पुरस्कार नहीं मिला. बजंरग इसे अदालत में चुनौती देना चाहते थे पर योगेश्वर दत्त की सलाह पर उन्होने ऐसा नहीं किया. उसके बाद 2019 का राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार मिला.

7 नीरज चोपड़ा (Neeraj Chopra)

नीरज चोपड़ा, जिन्होनें भारत के ओलंपिक खेल इतिहास में एक ऐसा अध्याय जोड़ दिया है जिसका इंतजार आजादी के बाद से था. ओलंपिक खेलों की एथलेटिक्स प्रतियोगिता में मेडल लाने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं. नीरज चोपड़ा ने जैवलीन थ्रो में स्वर्ण पदक (Gold Medal) जीता है. नीरज चोपड़ा ने 87.5 मीटर दूर भाला फेंक कर स्वर्ण पदक (Gold Medal) अपने नाम किया.

आधुनिक ओलंपिक खेलों का इतिहास 125 साल पुराना है और अब तक कोई भारतीय ट्रैक एंड फ़ील्ड प्रतियोगिताओं में कोई मेडल नहीं हासिल कर सका था. नीरज चोपड़ा व्यक्तिगत गोल्ड मेडल हासिल करने वाले भारत के दूसरे खिलाड़ी हैं. उनसे पहले अभिनव बिंद्रा ने भारत के लिए गोल्ड मेडल हासिल किया था

नीरज चोपड़ा क्वॉलिफाइंग राउंड से ही पहले स्थान पर रहे और आख़िर तक शीर्ष स्थान पर बने रहे. नीरज ने अपनी कामयाबी को भारत के लीजेंड एथलीटों को समर्पित किया है. इससे पहले भारत के दो एथलिट मिल्खा सिंह और पीटी उषा एथलेटिक्स प्रतियोगिता में चूक गए थे.

1960 के रोम ओलंपिक में मिल्खा सिंह सेकेंड के दसवें हिस्से से मेडल जीतने से चूक गए थे. इसके बाद 1984 के लॉस एंजेलिस ओलंपिक खेलों में पीटी उषा 400 मीटर हर्डल में कांस्य पदक से चूक गई थी. पीटी उषा ने नीरज की सफलता पर लिखा, “मेरा 37 साल से अधूरा पड़ा सपना पूरा कर दिया. शुक्रिया मेरे बेटे, नीरज चोपड़ा”

नीरज चोपड़ा हरियाणा के पानीपत से हैं और भारतीय सेना में सूबेदार है.

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