बिहार में ‘ईंट’ क्यों इकट्ठा कर रहे हैं लोग ?

हिमांशु कुमार की रिपोर्ट

आज से 47 साल पहले उत्तराखंड में एक आंदोलन की शुरुआत हुई थी. आंदोलन की शुरुआत चमोली जिले में कुछ महिलाओं ने की थी. पेड़ों को काटने से बचने के लिए गांव के लोग पेड़ से चिपक जाते थे, इसी वजह से इस आंदोलन का नाम ‘चिपको’ आंदोलन पड़ा था. सुंदरलाल बहुगुणा ने आगे इसका नेतृत्व किया था और फिर जो हुआ वो इतिहास का हिस्सा है.

उत्तर बिहार के लोग भी एक नए आंदोलन की राह पर हैं. युवा गांव-गांव से ‘ईंट’ इकट्ठा कर रहे हैं. आपने राम मंदिर के लिए ईंट जमा कर ‘कार सेवा’ के बारे में सुना होगा, लेकिन उत्तर बिहार खासकर दरभंगा, मधुबनी, सहरसा, सुपौल के लोग मंदिर या मस्जिद नहीं बल्कि अस्पताल बनाने के लिए ईंट जमा कर रहे हैं.

2014 में जब नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी की सरकार बनी तो देश में कई AIIMS बनाने की घोषणा की. मिथिला क्षेत्र की बड़ी आबादी की जरूरतों को पूरा करने के लिए दरभंगा में भी एम्स बनाने का ऐलान किया गया.

लेकिन 6 साल बाद भी दरभंगा एम्स का शिलान्यास तक नहीं हो पाने से लोगों में गुस्सा है. नाराजगी का आलम ये है कि अब लोगों ने खुद ही इसके शिलान्यास को लेकर तैयारियां शुरु कर दी है. इलाके में सक्रिय मिथिला स्टूडेंट्स यूनियन का कहना है, “सरकार 6 साल बाद भी #DarbhangaAIIMS का शिलान्यास नहीं कर पाई, अब जनता खुद शिलान्यास करेगी. अगले कुछ दिनों तक संगठन के सेनानी घर-घर जाएंगे ईंट जमा करेंगे. 8 सितंबर को 5 हजार से अधिक लोग ईंट लाकर खुद एम्स के लिए अधिकृत जमीन पर जुटेंगे और खुद शिलान्यास करेंगे.”

दरभंगा एम्स का निर्माण PMSSY के तहत होना है

केंद्र सरकार के द्वारा 2015-16 के बजट में दरभंगा एम्स की घोषणा हुई थी और 4 वर्षों में इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था. इस एम्स का निर्माण प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (PMSSY) के तहत दरभंगा मेडिकल कॉलेज के कैंपस में ही होना है.

दरभंगा एम्स की सुविधाओं की बात करें तो यहां 750 बेड की व्यवस्था होगी, साथ ही 100 अंडर ग्रेजुएट (MBBS) की सीट और 60 B.Sc(नर्सिंग) की सीट दिया जाना है।इन सब के अलावा दरभंगा एम्स में 15-20 सुपर स्पैशलिटी डिपार्टमेंट की व्यवस्था भी की जाएगी.

आखिर दरभंगा एम्स के निर्माण में ही देरी क्यों?

स्थानीय लोगों का कहना है की दरभंगा एम्स के निर्माण में ही देरी क्यों की जा रहा है जबकि इसके साथ और बाद में प्रस्तावित एम्स का निर्माण पूरा किया जा चुका है. नागपुर एम्स की घोषणा 2014 में हुई और यह बनकर तैयार है इसके साथ ही गोरखपुर एम्स, तेलंगाना एम्स, देवघर एम्स, बिलासपुर एम्स, गुवाहाटी एम्स सहित और भी कई एम्स का निर्माण पूरा कर लिया गया है और कई जगह लोगों को सुविधाएं भी मिल रही हैं और कक्षा भी प्रारम्भ हो चुकी है, जबकि दरभंगा एम्स के लिये अबतक एक ईंट भी नहीं गिरा है.

उत्तर बिहार की बड़ी आबादी को मिलेगा फायदा

दरभंगा एम्स के बनने से उत्तर बिहार, जिसमें मिथिला और कोसी के बाढ़ ग्रस्त क्षेत्र सहित अन्य जिलों के करीब 6-7 करोड़ से ज्यादा लोगों को लाभ मिलेगा. इस क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था बेहद खराब है जबकि निजी अस्पतालों में इलाज काफी महंगा. यहां के लोग इलाज के लिए दिल्ली एम्स का रुख करते हैं. कई आंकड़े और तथ्य ये बताते हैं कि दिल्ली एम्स की भीड़ का एक बड़ा हिस्सा इन क्षेत्रों के लोगों का ही होता है.

दरभंगा में एम्स बनाए जाने से उत्तर बिहार से लेकर कोसी और सीमांचल के सहरसा, सुपौल और पूर्णियां तक के लोगों को फायदा मिलेगा। लोगों को इलाज कराने के लिए पटना, दिल्ली, मुंबई भागने की जरूरत नहीं होगी.

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